यहां की स्वामीनारायण मंदिर द्वारा संचालित सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में छात्राओं के मासिक धर्म की जांच के लिए की गई शर्मनाक घटना को सीएम विजय रूपाणी ने दु:खद बताया है। उन्होंने आदेश दिया है कि इस मामले की जांच की जाए और जिम्मेदारों को बर्खास्त किया जाए।
पूरे राज्य में इसी मामले की चर्चा
इस मामले की पूरे राज्य में चर्चा है। शनिवार को अहमदाबाद में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने हेगडेवार भवन के लोकार्पण के बाद इस मामले पर मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में गंभीर है। गृह विभाग का आदेश दिया गया है कि मामले पर सख्त कार्रवाई की जाए। जो भी जिम्मेदार हो, उन्हें बर्खास्त किया जाए। दूसरी ओर सहजानंद इंस्टीट्यूट की प्रिंसीपल, को-आर्डिनेटर, सुपरवाइजर और चपरासी समेत चारों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
महिला आयोग सक्रिय
इस घटना के चलते महिला आयोग ने पश्चिम कच्छ के पुलिस अधीक्षक से पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है। इससे पुलिस विभाग हरकत में आ गया। पुलिस ने महिला कॉलेज पहुंचकर पीड़ित युवतियों से बात की। इसके बाद प्रिंसीपल रीटा बेन राणींगा, को-आर्डिनेटर अनिता बेन, प्यून नयना बेन और सुपरवाइजर रमीला बेन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इन पर आरोप है कि इन्होंने छात्राओं के मासिक धर्म की जांच के लिए उनके कपड़े उतरवाए। साथ ही यह धमकी भी दी थी कि इस्रका जिक्र किसी से किया, तो कॉलेज से निकाल दिया जाएगा।
सख्त कार्रवाई हो-कांग्रेस
इस मामले को शर्मनाक बताते हुए जिला कांग्रेस ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर यह मांग की है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि गुजरात में इस तरह की घटनाएं होती ही रहती हैं। इस घटना ने पूरी मानवता को शर्मसार किया है। ट्रस्टियों, संचालकों ने रूढीवादी मानसिकता का परिचय दिया है। इन्हें माफ नहीं किया जाना चाहिए।
3 महिला कर्मचारी बर्खास्त
कच्छ यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में छात्राओं के मासिक धर्म की जांच के संबंध में कुलपति दर्शना बेन ढोेलकिया ने बताया कि इस मामले में तीन महिला सदस्यों को लेकर एक जांच समिति बनाई गई है। इसके लिए जवाबदार तीन महिला कर्मचारियों प्राध्यापिका, रेक्टर और प्यून को बर्खास्त कर दिया गया है। इसकी जानकारी कलेक्टर को भी दे दी गई है।
लिखित आदेश नहीं मिला
इस संबंध में जब जिला कलेक्टर से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कॉलेज की तरफ से उन्हें अभी तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है।